‘विकास शुल्क’ का नया रास्ता या निजी स्कूलों पर मेहरबानी? आदेश के बाद उठे कई सवाल

हल्द्वानी/नैनीताल। नैनीताल जिले में निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था को लेकर जारी प्रशासनिक कार्रवाई अब नए सवालों के घेरे में आ गई है। जनवरी से मई 2026 तक जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग निजी स्कूलों की कथित मनमानी पर सख्त रुख अपनाते दिखाई दिए। निरीक्षण, नोटिस और अतिरिक्त वसूली पर कार्रवाई के दावे किए गए। हालांकि, 27 जून 2026 को जारी एक कार्यालय ज्ञापन के बाद अभिभावकों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है।
अभिभावकों का कहना है कि जिन शुल्कों को पहले अनुचित या अतिरिक्त वसूली माना जा रहा था, अब उन्हें “विकास शुल्क” (डेवलपमेंट फीस) के रूप में समायोजित करने का रास्ता खोल दिया गया है। हालांकि, इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से ऐसा कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है कि इस व्यवस्था का आधार क्या है।
जनवरी से जून तक बदला प्रशासनिक रुख
जनवरी 2026 में जिलाधिकारी नैनीताल ने निजी स्कूलों को एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकें लागू करने, किसी विशेष दुकान से पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य नहीं करने तथा अभिभावकों की सहमति के बिना शुल्क वृद्धि नहीं करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद अप्रैल 2026 में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने तीन वर्षों में 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि पर रोक, कॉशन मनी तथा री-एडमिशन फीस जैसी वसूली को नियमों के अनुरूप रखने के निर्देश जारी किए।
मई 2026 में मुख्य शिक्षा अधिकारी नैनीताल ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कथित अतिरिक्त वसूली को शिक्षण शुल्क में समायोजित करने की बात कही थी। इन आदेशों के बाद अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी थी।
27 जून के आदेश के बाद बढ़ी चर्चा
27 जून 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के बिंदु-4 में शिक्षण शुल्क और परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त अन्य शुल्कों का युक्तिसंगत समायोजन कर उन्हें “विकास शुल्क” के रूप में निर्धारित करने का उल्लेख किया गया। इसी बिंदु को लेकर अभिभावकों के बीच सबसे अधिक चर्चा हो रही है।
उनका सवाल है कि यदि पूर्व के शासनादेशों और शिक्षा विभाग के निर्देशों में इस प्रकार के अलग शुल्क का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, तो जिला स्तर पर यह व्यवस्था किस आधार पर लागू की गई।
उठ रहे हैं तीन प्रमुख सवाल
पहला सवाल यह है कि यदि शासन स्तर के आदेशों में “विकास शुल्क” का अलग प्रावधान नहीं था, तो क्या जिला स्तर पर ऐसा प्रावधान जोड़ा जा सकता है? अभिभावक चाहते हैं कि इस पर शासन स्पष्ट स्थिति बताए।
दूसरा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस आदेश के पीछे किसी नए फीस नियमन संबंधी प्रावधान या शासनादेश का आधार है। क्योंकि 27 जून के आदेश में पुराने शासनादेशों का ही उल्लेख किया गया है।
तीसरा सवाल यह है कि क्या परीक्षा शुल्क और अन्य मदों में सीमाएं तय करने के साथ यदि “विकास शुल्क” के नाम पर अतिरिक्त राशि लेने की अनुमति दी जाती है, तो इससे अभिभावकों को वास्तविक राहत मिलेगी या नहीं।
अभिभावकों की निगाह अब कार्रवाई पर
अभिभावकों का कहना है कि पूर्व में अतिरिक्त वसूली को आगामी महीनों की फीस में समायोजित करने की बात कही गई थी। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वास्तव में अभिभावकों को शुल्क समायोजन या वापसी का लाभ मिलता है या नहीं।
साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो कार्रवाई सभी स्कूलों पर समान रूप से होगी या केवल चुनिंदा संस्थानों तक सीमित रहेगी।
शासन से मांगा गया स्पष्टीकरण
अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि शिक्षा सचिव तथा महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि यह भ्रम दूर हो सके कि “विकास शुल्क” संबंधी व्यवस्था किस कानूनी अथवा प्रशासनिक आधार पर लागू की गई है।
(डिस्क्लेमर)
यह समाचार मुख्य शिक्षा अधिकारी एवं जिलाधिकारी कार्यालय नैनीताल द्वारा जारी सार्वजनिक आदेशों तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त सवाल और आशंकाएं अभिभावकों एवं संबंधित पक्षों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर आधारित हैं। यदि संबंधित विभाग या प्रशासन इस विषय में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।







