छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों का खेल! भाजपा नेता से जुड़े संस्थानों की 14 करोड़ की संपत्ति कुर्क, ईडी का बड़ा एक्शन

फर्जी छात्रों के नाम पर 29 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप, SC-ST छात्रवृत्ति घोटाले में जांच तेज

देहरादून/मेरठ। उत्तराखंड के बहुचर्चित एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज से जुड़े तीन शैक्षणिक संस्थानों की करीब 14 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कर ली हैं। ईडी की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में एक साथ की गई है। एजेंसी के अनुसार फर्जी छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति की राशि निकालकर करोड़ों रुपये के सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
13.83 करोड़ की संपत्तियां जब्त
ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जारी अपने छठे कुर्की आदेश में हरिद्वार और रुड़की स्थित भूमि, शैक्षणिक संस्थानों की इमारतों तथा सावधि जमा (एफडी) समेत कुल 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि ये संपत्तियां कथित घोटाले से अर्जित अवैध धन से जुड़ी हुई हैं।
29 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
ईडी की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों को दी जाने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया। आरोप है कि धर्मेंद्र भारद्वाज से जुड़े शिक्षण संस्थानों ने फर्जी छात्रों का रिकॉर्ड तैयार कर छात्रवृत्ति की रकम हासिल की और करीब 29 करोड़ रुपये का लाभ उठाया।
जांच में मेरठ स्थित महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी समेत कई शिक्षण संस्थानों की भूमिका सामने आई है। हालांकि धर्मेंद्र भारद्वाज ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि संबंधित संस्थानों की प्रबंधन समितियों से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
जांच में चौंकाने वाले खुलासे
ईडी के अनुसार छात्रवृत्ति के 6,208 दावों की जांच की गई, जिनमें से 2,895 दावे फर्जी पाए गए। यह कुल दावों का लगभग 46.63 प्रतिशत है। जांच में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में ऐसे छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति जारी हुई जो या तो परीक्षा में अनुपस्थित रहे, परीक्षा में असफल हो गए या फिर उनकी पात्रता ही संदिग्ध थी।
इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें लाभार्थी दिखाकर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति जारी कर दी गई। एजेंसी का कहना है कि यह सुनियोजित तरीके से सरकारी धन की हेराफेरी का मामला है।
2020 से चल रही है जांच
प्रवर्तन निदेशालय वर्ष 2020 से इस मामले की जांच कर रहा है। यह कार्रवाई उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई थी। जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग और छात्रवृत्ति राशि के दुरुपयोग से जुड़े कई वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की गई।
सरकार को करोड़ों का नुकसान
ईडी का कहना है कि छात्रवृत्ति योजना समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के छात्रों को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से बनाई गई थी, लेकिन फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। वहीं आरोपियों और उनसे जुड़े संस्थानों को अवैध आर्थिक लाभ मिला।
आगे हो सकते हैं बड़े खुलासे
जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि मामले में अभी और भी कई अहम खुलासे हो सकते हैं। ईडी अन्य संबंधित व्यक्तियों, संस्थानों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में और बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
मानस दर्पण न्यूज़ के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि छात्रवृत्ति जैसी जनकल्याणकारी योजना में कथित भ्रष्टाचार ने शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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