हल्द्वानी तहसील में पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली का आरोप, सुविधाएं शून्य – सवालों के घेरे में व्यवस्था

हल्द्वानी। हल्द्वानी तहसील परिसर में प्रवेश करते ही आम जनता को पार्किंग शुल्क के नाम पर वसूली का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस पार्किंग के लिए शुल्क लिया जा रहा है, वहां मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव दिखाई देता है।

पार्किंग स्थल की स्थिति इतनी बदहाल है कि हल्की बारिश के बाद पूरा परिसर पानी से लबालब भरकर तालाब का रूप ले लेता है। वाहन चालकों को मजबूरी में बड़े-बड़े गड्ढों और कीचड़ के बीच अपने दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े करने पड़ते हैं। सुविधाओं के नाम पर न तो समुचित जल निकासी की व्यवस्था है और न ही वाहन स्वामियों के लिए एक शौचालय तक उपलब्ध है।
आरोप है कि तहसील परिसर में प्रवेश करते ही दोपहिया और चारपहिया वाहनों से पार्किंग शुल्क वसूला जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या किसी सार्वजनिक सरकारी परिसर में बिना पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराए पार्किंग शुल्क वसूलना नियमों के अनुरूप है? यदि हां, तो इसके लिए कौन-सा आदेश या नियम लागू है?
शनिवार को इसी मुद्दे को लेकर विवाद की स्थिति भी पैदा हो गई। जानकारी के अनुसार, एक दोपहिया वाहन चालक ने पार्किंग शुल्क लिए जाने के संबंध में कर्मचारियों से नियमों की जानकारी मांगी। आरोप है कि इसके बाद पार्किंग कर्मचारियों ने करीब आधे घंटे तक मुख्य गेट बंद कर दिया, जिससे तहसील परिसर में आने-जाने वाले लोगों की लंबी कतार लग गई। आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और काफी देर तक आवागमन प्रभावित रहा।
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है तो उसके बदले जनता को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधायुक्त पार्किंग क्यों नहीं दी जा रही? आखिर इस शुल्क का उपयोग किस कार्य में किया जा रहा है? क्या संबंधित विभाग इस व्यवस्था की जांच करेगा और जनता को जवाब देगा?
अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करें कि पार्किंग शुल्क किस आधार पर वसूला जा रहा है, क्या यह पूरी तरह वैधानिक है, और यदि है तो जनता को इसके बदले निर्धारित सुविधाएं कब उपलब्ध कराई जाएंगी।






