पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर ‘मांग दिवस’ मनाया

राष्ट्रपति और मानवाधिकार आयोग को भेजा पत्र, नए मीडिया आयोग और पत्रकार सुरक्षा कानून की उठी मांग

देहरादून, 2 अक्टूबर। गांधी जयंती के अवसर पर जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखंड की ओर से देशभर में कार्यरत पत्रकारों के हितों, अधिकारों और सुरक्षा को लेकर ‘मांग दिवस’ मनाया गया। इस दौरान विभिन्न प्रस्ताव पारित किए गए तथा पत्रकारों से जुड़ी मांगों को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई।

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष उमाशंकर प्रवीण मेहता और प्रदेश महासचिव गिरीश पंत की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में कहा गया कि पत्रकार लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुरक्षित मीडिया का वातावरण लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। पत्र में बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया गया।

नए मीडिया आयोग के गठन की मांग

यूनियन ने देश में एक नए और व्यापक मीडिया आयोग के गठन की मांग की। संगठन का कहना है कि दूसरा प्रेस आयोग वर्ष 1978 में गठित हुआ था और उसने 1982 में अपनी रिपोर्ट दी थी। इसके बाद मीडिया के क्षेत्र में तकनीकी और संरचनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव हुए हैं।

24 घंटे के समाचार चैनलों, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के तेजी से विस्तार का उल्लेख करते हुए यूनियन ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में मीडिया क्षेत्र की चुनौतियों, नियमन, तकनीक और पत्रकारिता के नैतिक पक्षों की समीक्षा के लिए नए मीडिया आयोग की आवश्यकता है।

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून की मांग

यूनियन ने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की सुरक्षा के लिए अलग केंद्रीय कानून बनाने की मांग भी की। पत्र में पत्रकारों के सामने कथित रूप से आने वाली शारीरिक हमले, हिरासत, ऑनलाइन उत्पीड़न और संस्थागत दबाव जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया गया।

संगठन ने कहा कि पत्रकार और मीडिया कर्मचारी बिना भय के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें, इसके लिए उन्हें हिंसा और अनुचित दबाव से सुरक्षा देने वाली प्रभावी कानूनी व्यवस्था आवश्यक है।

वर्किंग जर्नलिस्ट के लिए विशेष सुरक्षा बहाल करने की मांग

जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखंड ने वर्किंग जर्नलिस्ट से जुड़े पुराने कानूनी सुरक्षा प्रावधानों को बहाल करने की मांग की। यूनियन ने वर्किंग जर्नलिस्ट एंड अदर न्यूजपेपर एम्प्लॉइज (कंडीशंस ऑफ सर्विस) एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट, 1955 तथा वर्किंग जर्नलिस्ट (फिक्सेशन ऑफ रेट्स ऑफ वेजेज) एक्ट, 1958 से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि नए श्रम कानूनों के लागू होने के बाद पत्रकारों के लिए पहले उपलब्ध कुछ विशेष सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बनी हुई है।

यूनियन ने पत्रकारों की नौकरी की सुरक्षा, कार्य के घंटे, सेवा संबंधी विवादों के समाधान और सेवा समाप्ति से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करने की मांग की।

मीडिया कर्मचारियों के लिए नए वेज बोर्ड की मांग

पत्र में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े कर्मचारियों के लिए नए वेज बोर्ड के गठन की मांग भी की गई। यूनियन के अनुसार पत्रकारों और गैर-पत्रकार कर्मचारियों के लिए अंतिम कानूनी वेज बोर्ड के रूप में मजीठिया वेज बोर्ड का गठन वर्ष 2007 में हुआ था। इसके बाद महंगाई और जीवन-यापन की लागत में काफी बदलाव आया है।

संगठन ने वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मीडिया कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा और नए वेज बोर्ड के गठन की मांग की।

‘स्वतंत्र और सुरक्षित प्रेस लोकतंत्र के लिए जरूरी’

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र की सजग प्रहरी है। पत्रकार समाज, शासन और व्यवस्था के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम हैं तथा जनसरोकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का कार्य करते हैं।

वक्ताओं ने कहा कि देशभर में कार्यरत पत्रकारों के अधिकारों, सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक हितों के संरक्षण के लिए प्रभावी एवं ठोस पहल की आवश्यकता है।

इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष उमाशंकर प्रवीण मेहता, प्रदेश महासचिव गिरीश पंत, कोषाध्यक्ष ललिता बलूनी, जिला अध्यक्ष मूलचंद शीर्षवाल, जिला महासचिव ज्योति भट्ट, कवर सिंह सन्धू, एसपी उनियाल, अधीर मुर्खजी, द्विजेन्द्र दत्त बहुगुणा, दीपक गुप्ता, अभिनव नायक, विजय रावत, देवेंद्र चमोली, समीना, पूर्व जिला अध्यक्ष मोहम्मद शाह नजर, राजीव आनंद, अफरोज खान, अशोक शर्मा, विश्वजीत, अनिल वर्मा, किशन सिंह गुसाईं समेत कई पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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