एम्स किच्छा भर्ती फर्जीवाड़े में जांच तेज, आउटसोर्स एजेंसी के कार्यालय से डिजिटल रिकॉर्ड जब्त
पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने कंप्यूटर-लैपटॉप किए सील, मैनेजर विनायक की भूमिका जांच के केंद्र में

ऋषिकेश/किच्छा, 2 अक्टूबर 2026।
एम्स के किच्छा स्थित निर्माणाधीन सेटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने और अभ्यर्थियों से रकम मांगने के मामले में पुलिस जांच तेज हो गई है। ताजा कार्रवाई में पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने एम्स परिसर में कार्यरत आउटसोर्स एजेंसी राजदीप इंटरप्राइजेज के कार्यालय की तलाशी लेकर कंप्यूटर, लैपटॉप और अन्य डिजिटल दस्तावेज जांच के लिए सील किए हैं।
मामला सामने आने के बाद से ही पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि किच्छा सेटेलाइट सेंटर में नौकरी के नाम पर कथित फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने और अभ्यर्थियों से धनराशि लेने में किन-किन लोगों की भूमिका रही। पुलिस की प्रारंभिक जांच में आउटसोर्स एजेंसी से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आई है।
कार्यालय से डिजिटल सामग्री कब्जे में
पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने एम्स परिसर स्थित एजेंसी के कार्यालय में पहुंचकर वहां मौजूद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की। रिपोर्ट के अनुसार कंप्यूटर, लैपटॉप तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड सील कर पुलिस अपने साथ ले गई है। इन उपकरणों की जांच के जरिए कथित नियुक्ति पत्रों की तैयारी, दस्तावेजों के इस्तेमाल और संभावित लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जुटाए जाने की कोशिश की जा रही है।
कार्रवाई के दौरान कार्यालय में केवल एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद था, जबकि एजेंसी से जुड़े कई अन्य कर्मचारी वहां नहीं मिले। एक कर्मचारी सौम्या की भूमिका भी पुलिस जांच के दायरे में बताई गई है। कुछ कथित दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है, हालांकि उसके हस्ताक्षर किस परिस्थिति में हुए और उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मैनेजर विनायक की भूमिका पर पुलिस की नजर
पुलिस की जांच फिलहाल राजदीप इंटरप्राइजेज के स्थानीय मैनेजर विनायक की भूमिका पर भी केंद्रित है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह घटना सामने आने के बाद से फरार बताया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि किच्छा सेटेलाइट सेंटर में कथित नियुक्ति पत्र जारी करने के लिए उसके पास किस स्तर तक अधिकार थे। पुलिस ने उसके खिलाफ आगे कार्रवाई और गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
पुलिस एजेंसी के गांधी नगर स्थित मुख्य कार्यालय के संचालकों की भूमिका की भी जांच कर रही है। उनसे पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए जाने की तैयारी की बात सामने आई है।
पहले पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है
इस मामले में सितंबर में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान दो संदिग्ध नियुक्ति पत्र और दो लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने, फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने तथा उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी रखी है।
बाद की जांच में आउटसोर्स एजेंसी के मैनेजर और उससे जुड़े अन्य लोगों के संबंध में पूछताछ का दायरा बढ़ा है। हालांकि पुलिस जांच में सामने आए आरोपों और बयानों को अभी न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
फॉरेंसिक जांच से सामने आएंगी अहम कड़ियां
पुलिस द्वारा जब्त किए गए कंप्यूटर, लैपटॉप और डिजिटल दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित नियुक्ति पत्र कब और किस सिस्टम से तैयार हुए, किन लोगों ने उनका इस्तेमाल किया तथा एजेंसी के कार्यालय से इस मामले में कोई डिजिटल संचार या रिकॉर्ड जुड़ा था या नहीं।







