एक सड़क के लिए डेढ़ साल का संघर्ष, हाईकोर्ट से जिलाधिकारी तक पहुंचा मामला
मोरा गांव की सड़क पर अब प्रगति रिपोर्ट की मांग, आरटीआई के बाद प्रथम अपील में हुआ खुलासा

हल्द्वानी। ग्राम सभा मोरा, जनपद नैनीताल में सड़क निर्माण न होने का मामला माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड, नैनीताल में प्रथम अपील की सुनवाई के बाद फिर चर्चा में आ गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया पिछले करीब डेढ़ वर्ष से सड़क निर्माण के लिए शासन और प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर लगातार पत्राचार कर रहे हैं। पत्र एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक पहुंचते रहे, लेकिन निर्माण का समाधान नहीं हो सका।
जनहित के इस मुद्दे को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। प्रथम अपील की सुनवाई में सामने आया कि संबंधित पत्र को कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी नैनीताल को भेजा गया है। आदेश में पत्र संख्या 5800/UHC/Admin.B/Misc./2021 दिनांक 07 सितंबर 2026 के माध्यम से जिलाधिकारी नैनीताल को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजे जाने का उल्लेख है।
कार्रवाई का हिसाब मांगने के लिए आरटीआई का सहारा लिया गया। गौनिया ने 9 जुलाई 2026 को आरटीआई लगाकर अपने जनहित पत्र पर हाईकोर्ट स्तर पर हुई कार्रवाई, पत्र की प्राप्ति, फाइल की आवाजाही, अधिकारियों की कार्रवाई, रिपोर्ट और वर्तमान स्थिति समेत 10 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। प्रथम अपील की सुनवाई में राज्य लोक सूचना अधिकारी भी उपस्थित हुए।
17 सितंबर 2026 के प्रथम अपील आदेश में दर्ज है कि संबंधित आवेदन पर 10 अगस्त 2026 की नोटशीट में अंडर प्रोसेस लिखा गया था और बाद में प्रकरण जिलाधिकारी नैनीताल को कार्रवाई के लिए भेजा गया। आदेश में यह भी कहा गया कि सूचना उपलब्ध करा दी गई है और असंतोष की स्थिति में राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील की जा सकती है।
सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि केवल अंडर प्रोसेस लिखने से जनहित की समस्या का समाधान नहीं होता। उनका कहना है कि अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि मामला किस विभाग और किस स्तर पर लंबित है, जिलाधिकारी ने क्या कार्रवाई की और सड़क निर्माण की समयबद्ध योजना क्या है।
गौनिया ने हाईकोर्ट से पुनः निवेदन किया है कि यदि नियमानुसार उचित हो तो उनके मूल जनहित पत्र को पीआईएल लेटर के रूप में सक्षम स्तर पर विचारार्थ रखा जाए, जिलाधिकारी नैनीताल से वर्तमान प्रगति रिपोर्ट मंगाई जाए और यह स्पष्ट कराया जाए कि वर्षों से सड़क निर्माण क्यों लंबित है।

उनका कहना है कि सड़क के अभाव में ग्रामीणों को पैदल आवागमन और आपात स्थिति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह संघर्ष व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण जनता के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 10 बिंदुओं पर पूर्ण और प्रश्नवार सूचना व संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए तो राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील की जाएगी।







