इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सकों को जांच प्रक्रिया को लेकर किया जागरूक
EMA की महत्वपूर्ण बैठक में प्रतिष्ठान पर स्पष्ट बोर्ड लगाने, पैथी के अनुरूप चिकित्सा पद्धति अपनाने पर जोर


हरिद्वार। इलेक्ट्रोहोम्योपैथी मेडिकल एसोसिएशन (EMA) की ओर से बालाजी इंस्टीट्यूट एंड कैंसर रिसर्च सेंटर स्थित EMA कैंपस में रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से जुड़े चिकित्सकों को वर्तमान परिस्थितियों में आवश्यक दस्तावेज, क्लीनिकल प्रैक्टिस तथा जांच प्रक्रिया के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

बैठक को संबोधित करते हुए EMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के.पी.एस. चौहान ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार से संबंधित जांच विशेषज्ञ टीम द्वारा विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के चिकित्सकों एवं उनके प्रतिष्ठानों से संबंधित जानकारियों की जांच की जा रही है। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि वे अपने-अपने प्रतिष्ठानों पर “इलेक्ट्रोहोम्योपैथी क्लीनिक” का स्पष्ट उल्लेख करते हुए बोर्ड लगाएं तथा अपनी चिकित्सा प्रणाली से संबंधित आवश्यक जानकारी और अभिलेख व्यवस्थित रखें।
उन्होंने चिकित्सकों को सलाह दी कि वे अपनी पैथी के अनुरूप निर्धारित स्पेजरिक मेडिसिन का ही उपयोग करें तथा क्लीनिक में दूसरी चिकित्सा प्रणालियों की दवाओं को अनावश्यक रूप से न रखें। साथ ही, रोगियों की जांच एवं चिकित्सा में अपनी प्रणाली से संबंधित नैदानिक तकनीकों और प्रक्रियाओं का पालन करने पर जोर दिया गया।
बैठक में यह भी कहा गया कि यदि जांच टीम द्वारा किसी प्रतिष्ठान अथवा चिकित्सक से संबंधित जानकारी मांगी जाती है तो उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर सही एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए। चिकित्सकों को रोगियों के उपचार, जांच के आधार तथा चिकित्सा संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने के संबंध में भी जानकारी दी गई।
बैठक में रोगियों के उपचार की प्रक्रिया, विभिन्न प्रकार की जांच तथा रोगी की प्रतिरोधक क्षमता को सामान्य बनाए रखने के लिए अपनाई जाने वाली चिकित्सा संबंधी जानकारी पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा बायोम फार्मा द्वारा निर्मित स्पेजरिक दवाओं को लेकर भी चिकित्सकों को इनके संबंध में उपलब्ध जानकारी और आधार बताए गए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. चौहान ने चिकित्सकों से अपील की कि वे अपने-अपने क्लीनिकों में पारदर्शिता, रिकॉर्ड संधारण और अपनी चिकित्सा प्रणाली के अनुरूप प्रैक्टिस को प्राथमिकता दें, ताकि किसी भी निरीक्षण अथवा जांच के दौरान आवश्यक जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जा सके।
बैठक में मुकेश चौहान, डॉ. एन.एस. टाकुली, डॉ. वी.एल. अलखानिया, डॉ. ऋचा ठाकुर, डॉ. शमा प्रवीण, डॉ. अर्चना शर्मा, डॉ. अनादि बिस्वास (ऊधमसिंह नगर), डॉ. बी.बी. कुमार, डॉ. हरबंस सिंह, डॉ. आदेश शर्मा, डॉ. गुलाम साबिर, डॉ. सुरेंद्र कल्याण (सहारनपुर), डॉ. अशोक कुशवाहा, डॉ. विक्रम सिंह चौहान, डॉ. सुनील अग्रवाल, डॉ. आफाक अली, डॉ. राशिद अब्बासी, डॉ. चांद उस्मान, डॉ. सुबोध चौहान, डॉ. विनीत सहगल, डॉ. अशवध अंसारी, डॉ. सचेष्ट मुखर्जी, डॉ. कमलेश खंडूरी, डॉ. सी.पी. रतूड़ी, डॉ. रामकुमार, डॉ. वी.के. सैनी, डॉ. निपाल सिंह, डॉ. अब्दुल गफूर, डॉ. एम.एस. कश्यप, डॉ. संदीप पाल, डॉ. रमेश जालान, डॉ. ज्ञानेश्वर शर्मा सहित हरिद्वार एवं देहरादून के अनेक चिकित्सक उपस्थित रहे।







