सड़कों पर आवारा पशु बने जानलेवा, हादसे में घायल युवक की चार दिन बाद मौत
तीनपानी में गाय को बचाने के प्रयास में स्कूटी अनियंत्रित होने से हुआ था हादसा, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल


हल्द्वानी। शहर और आसपास के क्षेत्रों में सड़कों पर खुलेआम घूम रहे आवारा पशु अब राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। बरेली रोड स्थित तीनपानी के पास गाय को बचाने के प्रयास में स्कूटी से गिरकर घायल हुए युवक की उपचार के दौरान चार दिन बाद मौत हो गई। घटना ने एक बार फिर सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं की समस्या और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार बरेली रोड की गली नंबर-11, पर्वतीय मोहल्ला निवासी 32 वर्षीय कमलेश साहू पुत्र बाल गोविंद साहू 25 अगस्त की रात स्कूटी से जा रहे थे। तीनपानी के पास अचानक एक गाय उनके सामने आ गई। गाय को बचाने के प्रयास में उन्होंने स्कूटी को मोड़ने का प्रयास किया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर गिर गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के बाद कमलेश को गंभीर हालत में एसटीएच के आईसीयू में भर्ती कराया गया। लगातार चार दिन तक उपचार के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और शुक्रवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।
एक हादसा नहीं, लगातार बढ़ती समस्या
शहर के बरेली रोड, तीनपानी सहित कई प्रमुख मार्गों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा आम हो गया है। दिन के समय जहां ये पशु यातायात के बीच घूमते नजर आते हैं, वहीं रात में सड़क पर बैठे पशु वाहन चालकों के लिए और अधिक खतरनाक साबित होते हैं। अचानक सामने आने वाले पशु को बचाने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होने से गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा पशुओं की समस्या को लेकर समय-समय पर अभियान चलाए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें खुले में छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
जिम्मेदारी तय करने का समय
कमलेश साहू की मौत ने प्रशासन, नगर निकाय और संबंधित विभागों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सड़कों को आवारा पशुओं से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी कब प्रभावी ढंग से निभाई जाएगी?
जरूरत है कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर विशेष अभियान चलाया जाए और प्रमुख मार्गों को आवारा पशुओं से मुक्त रखने की स्थायी व्यवस्था की जाए। क्योंकि किसी दुर्घटना के बाद उपचार या मुआवजा देना समाधान नहीं है—जरूरत उस व्यवस्था की है जो दुर्घटना होने से पहले लोगों की जान बचा सके।







