24 घंटे में राज्य छोड़ने का नोटिस, हाईकोर्ट से मिली राहत: पाकिस्तान से आए सिख परिवार के भविष्य पर टिकीं निगाहें

नैनीताल/देहरादून। कल्पना कीजिए कि एक सुबह आपके दरवाजे पर एक नोटिस पहुंचे और उसमें लिखा हो कि आपको 24 घंटे के भीतर यह राज्य छोड़ना होगा। न कोई तैयारी का समय, न बच्चों की पढ़ाई का ख्याल और न ही वर्षों से बसे जीवन को समेटने का अवसर। देहरादून के वसंत विहार में रह रहे पाकिस्तानी मूल के सिख नागरिक सरदार मनजीत सिंह और उनके परिवार के सामने कुछ ऐसी ही स्थिति खड़ी हो गई। हालांकि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल परिवार को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक बरकरार रखी है।

पांच साल में भारत बन गया घर
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के निवासी मनजीत सिंह वर्ष 2019 में अपने परिवार के साथ लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी) पर भारत आए थे। उनके अनुसार उनका वीजा वर्तमान में भी वैध है और समय-समय पर उसका नवीनीकरण किया जाता रहा है।
इन पांच वर्षों में परिवार का जीवन पूरी तरह भारत से जुड़ चुका है। उनकी बड़ी बेटी बीटेक की पढ़ाई कर रही है और इंजीनियर बनने का सपना देख रही है। दूसरी बेटी बीडीएस की छात्रा है और दंत चिकित्सक बनने की तैयारी में जुटी हुई है। परिवार का सबसे छोटा बेटा स्कूल में अध्ययनरत है। बच्चों की शिक्षा, सामाजिक जीवन, मित्र, पड़ोस और भविष्य की तमाम योजनाएं अब भारत में ही केंद्रित हैं।
31 मई को जारी हुआ नोटिस
मामले के अनुसार राज्य सरकार ने 31 मई को मनजीत सिंह को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर राज्य छोड़ने का निर्देश दिया था। यह नोटिस उन्हें दो जून को प्राप्त हुआ। अचानक मिले इस आदेश ने पूरे परिवार को असमंजस और चिंता में डाल दिया।
मनजीत सिंह ने इस आदेश को उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना है कि वे वैध दस्तावेजों के साथ भारत में रह रहे हैं और उनके बच्चों का भविष्य यहां की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ चुका है।
हाईकोर्ट ने मांगा सरकार का पक्ष
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की विस्तृत जांच आवश्यक है और इसके लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है। सरकार ने सुरक्षा संबंधी पहलुओं का हवाला देते हुए जांच पूरी होने तक समय देने का अनुरोध किया।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त तय की गई है। तब तक परिवार के खिलाफ जारी आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी।
आईटीबीपी मुख्यालय के पास निवास को लेकर चिंता
राज्य सरकार का कहना है कि जिस क्षेत्र में मनजीत सिंह का परिवार निवास कर रहा है, वहां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) का मुख्यालय स्थित है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से मामले की गहन जांच आवश्यक है।
राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होती है। लेकिन दूसरी ओर एक ऐसा परिवार भी है जो वर्षों से भारत में रह रहा है और जिसका वर्तमान तथा भविष्य यहां की सामाजिक व्यवस्था से जुड़ चुका है। यही कारण है कि यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि संवेदनशील मानवीय पहलुओं से भी जुड़ गया है।
कानूनी दस्तावेजों के पीछे हैं कई सपने
फाइलों और दस्तावेजों में भले ही केवल नाम, वीजा संख्या और कानूनी प्रावधान दिखाई देते हों, लेकिन उनके पीछे कई मानवीय कहानियां भी छिपी होती हैं। एक बेटी इंजीनियर बनने का सपना देख रही है, दूसरी डॉक्टर बनने की राह पर आगे बढ़ रही है और एक छोटा बच्चा अपने भविष्य की बुनियाद तैयार कर रहा है।
परिवार का कहना है कि उनके लिए भारत केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत और बच्चों के सपनों का आधार बन चुका है।
सीएए से भी जुड़ी हैं उम्मीदें
देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समुदाय के लोगों के लिए भारतीय नागरिकता का मार्ग खुला है।
उत्तराखंड में अब तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए 153 हिंदू और सिख शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिल चुकी है, जबकि कई अन्य मामलों की जांच और प्रक्रिया अभी जारी है। ऐसे में मनजीत सिंह जैसे परिवारों की उम्मीदें भी इसी व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं।
सीमावर्ती प्रांत से जुड़ी है पृष्ठभूमि
मनजीत सिंह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से आते हैं। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। पाकिस्तान की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार करोड़ों की आबादी वाले इस प्रांत में हिंदू समुदाय की संख्या लगभग 50 हजार और सिख समुदाय की आबादी करीब 10 हजार बताई जाती है।
11 अगस्त पर टिकीं निगाहें
अब इस मामले में अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। अदालत के समक्ष केवल एक प्रशासनिक आदेश की वैधता का प्रश्न नहीं होगा, बल्कि यह भी तय होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जाए।
फिलहाल मनजीत सिंह और उनका परिवार राहत की सांस ले रहा है। लेकिन उनके घर में अब एक तारीख सबसे ज्यादा चर्चा में है—11 अगस्त। क्योंकि कभी-कभी अदालतों में केवल मुकदमों की सुनवाई नहीं होती, बल्कि पूरे परिवारों का भविष्य भी फैसला होने का इंतजार करता है।








