कामर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी पर भड़का व्यापारी वर्ग “जनता के साथ छल” का आरोप, मजदूर दिवस पर विरोध तेज

हल्द्वानी, 1 मई 2026। कामर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में एकमुश्त ₹993 की भारी बढ़ोतरी ने उत्तराखंड के कारोबारी वर्ग में तीखी नाराजगी पैदा कर दी है। सशक्त एकता उद्योग व्यापार मंडल ने इस फैसले को “जनता के साथ छल” करार देते हुए जोरदार विरोध दर्ज कराया है। मजदूर दिवस के दिन यह मुद्दा और अधिक गरमा गया, क्योंकि इसका सीधा असर छोटे कारोबारियों, ठेले-फड़ संचालकों और गरीब वर्ग की जेब पर पड़ रहा है।
राजधानी दिल्ली में कामर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2078.50 से बढ़कर ₹3071.50 हो गई है। वहीं कोलकाता में यह ₹3202, मुंबई में ₹3024 और चेन्नई में ₹3237 तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश के शहरों में भी कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है—आगरा में ₹3125.50, लखनऊ में ₹3194 और गोरखपुर में ₹3255.50 तक दाम पहुंच गए हैं।
इसके अलावा 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की कीमत भी ₹261 बढ़कर ₹810 हो गई है, जो मुख्य रूप से मजदूरों, छात्रों और छोटे प्रतिष्ठानों में उपयोग होता है। हालांकि घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और दिल्ली में यह ₹913 पर स्थिर है।
प्रदेश संगठन महामंत्री भुवन भट्ट ने कहा कि इस बढ़ोतरी से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर आम जनता की थाली पर पड़ेगा।
तरूण वानखेड़े के अनुसार बाहर का खाना महंगा होने से ग्राहकों की संख्या घटेगी और व्यापारियों का मार्जिन कम होगा, जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब और प्रवासी मजदूर होंगे।
सीमा बत्रा ने चिंता जताते हुए कहा कि 5 किलो सिलेंडर महंगा होने से छात्रों और कामगारों का जीवनयापन कठिन हो जाएगा।
वहीं ज्योति अवस्थी ने इसे “चुनाव का तोहफा” बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होते ही दाम बढ़ाना जनता को गुमराह करने जैसा है।
संजय बिष्ट ने कहा कि पहले से ही विभिन्न करों का बोझ झेल रहे व्यापारियों पर अब गैस की मार ने हालात और खराब कर दिए हैं।
तेज सिंह कार्की के मुताबिक इस बढ़ोतरी का असर जल्द ही बाजार में दिखेगा और होटल-रेस्टोरेंट के बिल से लेकर चाय-समोसे तक सब महंगा हो सकता है।
सरकार का पक्ष
सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का परिणाम है। उनका तर्क है कि कामर्शियल सिलेंडर कुल खपत का केवल 1% हिस्सा है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 14.2 किलो सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई हैं।
नई व्यवस्था भी लागू
1 मई से LPG सिलेंडर की डिलीवरी के लिए OTP अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि घरेलू सिलेंडर पर मिलने वाली राहत कब तक बरकरार रहेगी, या आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं को भी बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल बढ़ती महंगाई के बीच इस फैसले ने आमजन और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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