10 सितंबर को गूंजेगी पंडित गोविंद बल्लभ पंत की गौरवगाथा, कुमाऊं मंडल में होंगे भव्य आयोजन


पैतृक गांव खूंट से लेकर देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा और हल्द्वानी तक कार्यक्रमों की तैयारी; विद्यालयों में भाषण-निबंध और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के जरिए नई पीढ़ी को बताएंगे पंत का योगदान
गौरापड़ाव/हल्द्वानी/नैनीताल। भारत रत्न एवं महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती आगामी 10 सितंबर 2026 को पूरे उत्तराखंड में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। पंडित पंत की जयंती को लेकर कुमाऊं मंडल सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में विविध कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही हैं। उनके पैतृक गांव खूंट (अल्मोड़ा) से लेकर देहरादून और कुमाऊं के विभिन्न शहरों में जयंती समारोह आयोजित किए जाएंगे।
विद्यालयों में भाषण और निबंध प्रतियोगिताओं के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को पंडित पंत के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान और आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराया जाएगा।
यह जानकारी पूर्व दर्जा राज्य मंत्री एवं भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत जन्म जयंती समारोह समिति के उत्तराखंड प्रदेश मुख्य संयोजक गोपाल सिंह रावत ने दी।
नई पीढ़ी तक पहुंचाए जाएंगे पंडित पंत के विचार
गोपाल सिंह रावत ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव और प्रेरणा के प्रतीक हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश, समाज और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि जयंती समारोह समिति का उद्देश्य केवल पंडित पंत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं है। नई पीढ़ी को उनके संघर्ष, विचारों और राष्ट्रसेवा से परिचित कराना समिति की प्राथमिकता है।
रावत ने कहा कि आज के युवाओं को यह जानना जरूरी है कि किस प्रकार कुमाऊं की धरती से निकले पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
खूंट से लेकर देहरादून तक होंगे कार्यक्रम
समारोह समिति के मुख्य प्रदेश संयोजक गोपाल सिंह रावत ने बताया कि जयंती के अवसर पर पंडित पंत के पैतृक गांव खूंट, देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, हल्द्वानी, रुद्रपुर, भवाली समेत कुमाऊं मंडल के विभिन्न नगरों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न ब्लॉक और तहसील मुख्यालयों में भी जयंती समारोह आयोजित कर महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रनिर्माता को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि विभिन्न विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा भाषण, निबंध और अन्य शैक्षिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
कुली बेगार आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक बताएंगे योगदान
गोपाल रावत ने कहा कि विद्यालयों में होने वाली प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को पंडित गोविंद बल्लभ पंत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, कुली बेगार आंदोलन, सामाजिक सुधारों, प्रशासनिक क्षमता और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में अपने इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के महानायकों के प्रति सम्मान की भावना विकसित होगी। साथ ही युवा अपनी संस्कृति, इतिहास और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों से भी जुड़ सकेंगे।
कुमाऊं की धरती के महान सपूत थे पंडित पंत
गोपाल सिंह रावत ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने कुमाऊं की धरती से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
आजादी के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। इसके बाद देश के गृह मंत्री के रूप में भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी प्रशासनिक क्षमता, जनसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता आज भी समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
माल्यार्पण तक सीमित नहीं होगी जयंती
रावत ने कहा कि पंडित पंत की जयंती मनाने का वास्तविक उद्देश्य उनके विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति और विशेष रूप से युवाओं तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जयंती समारोहों को केवल औपचारिक कार्यक्रम न बनाकर विद्यार्थियों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि 10 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम पंडित पंत को श्रद्धांजलि देने के साथ ही उनकी राष्ट्रसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित की राजनीति के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेंगे।
युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करना लक्ष्य
मुख्य प्रदेश संयोजक गोपाल सिंह रावत ने कहा कि देश तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में युवाओं को अपने महान राष्ट्रनिर्माताओं के जीवन और संघर्ष से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि समारोह समिति का प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा। विद्यालयों में प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को इतिहास से जोड़ने के साथ उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी, समाजसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित की जाएगी।





