भुजियाघाट–टोक मोरा सड़क: 4.20 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को सैद्धांतिक मंजूरी, 538 पेड़ों की कटाई की सीमा

समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टविस्ट हेमंत गोनिया की मुहिम को बड़ी प्रशासनिक सफलता

हल्द्वानी। भुजियाघाट से टोक मोरा तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर पिछले करीब चार वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टविस्ट हेमंत गोनिया की मुहिम को बड़ी प्रशासनिक सफलता मिली है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून ने 24 सितंबर 2026 को भुजियाघाट से टोक मोरा किलोमीटर 1 से 6 तक सड़क निर्माण के लिए 4.20 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के डायवर्जन को Stage-I यानी सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है।

प्रधानमंत्री से लेकर पर्यावरण मंत्रालय तक भेजे पत्र

हेमंत गोनिया के अनुसार, इस सड़क के लिए उन्होंने लंबे समय से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त सहित शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों को लगातार पत्र भेजे। मामले को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समक्ष भी शिकायत और पत्राचार के माध्यम से उठाया गया। साथ ही आरटीआई के माध्यम से संबंधित जानकारी भी मांगी गई।

कोविड ने रोकी थी प्रक्रिया

गोनिया के अनुसार, सड़क निर्माण के संबंध में पूर्व में की गई शिकायतों पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई थी और मामला आगे बढ़ा था, लेकिन इसी दौरान कोविड-19 महामारी आने से सरकारी कामकाज और विकास कार्य प्रभावित हुए और यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया।

कोविड-19 के बाद हेमंत गोनिया ने मामले को दोबारा लगातार उठाया। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, शासन तथा संबंधित विभागों को पत्र भेजकर सड़क निर्माण की मांग जारी रखी और पर्यावरण मंत्रालय में भी शिकायत की। उपलब्ध दस्तावेजों से वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री कार्यालय एवं अन्य अधिकारियों को किए गए पत्राचार का रिकॉर्ड भी सामने आया है। इन पत्रों में मोरा गांव के ग्रामीणों की सड़क संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।

गर्भवती महिलाओं और मरीजों की परेशानी का उठा मुद्दा

भुजियाघाट–टोक मोरा सड़क का मुद्दा केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहा। पत्रों में ग्रामीणों की आवाजाही, मरीजों तथा विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को मुख्य सड़क तक पहुंचाने में आने वाली कठिनाइयों का उल्लेख किया गया। समाचार कटिंग में “सड़क लापता, प्रसूता नवजात के साथ डोली पर हुई सवार” शीर्षक से सड़क सुविधा के अभाव की समस्या को सामने रखा गया है।

हाईकोर्ट कार्यालय से जिलाधिकारी को पत्र

इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) धीरेंद्र भट्ट द्वारा 7 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी नैनीताल को पत्र भेजे जाने की बात भी सामने आई है। पत्र संख्या UHC/Admin.B/Misc./2021, No. 5801 में हेमंत सिंह गोनिया द्वारा ग्राम सभा मोरा, जनपद नैनीताल में सड़क निर्माण नहीं होने से संबंधित पत्र की प्रति जिलाधिकारी को “सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई” हेतु भेजी गई। इसकी प्रति हेमंत गोनिया को भी सूचनार्थ भेजी गई।

4.20 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन, 538 पेड़ों तक कटाई की सीमा

Stage-I मंजूरी के तहत भुजियाघाट से टोक मोरा किलोमीटर 1 से 6 तक सड़क निर्माण के लिए 4.20 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के डायवर्जन को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। यह परियोजना लोक निर्माण विभाग के पक्ष में है और नैनीताल वन प्रभाग के क्षेत्र में आती है।

मंजूरी में वन क्षेत्र में अधिकतम 538 पेड़ों, जिनमें 288 पौधे भी शामिल हैं, की कटाई की सीमा निर्धारित की गई है। शर्तों के अनुसार, पेड़ काटने से पहले उनके स्थानांतरण की संभावनाएं तलाशनी होंगी और केवल अपरिहार्य स्थिति में ही कटाई की जाएगी। कटाई राज्य वन विभाग की निगरानी में होगी।

8.40 हेक्टेयर पर 9,240 पौधे लगाने की शर्त

वन भूमि के बदले 8.40 हेक्टेयर सिविल सोयम भूमि पर कुल 9,240 पौधे लगाए जाने की शर्त रखी गई है। प्रस्तावित पौधारोपण स्थल ग्राम सेठी धरकोट पट्टी, मल्लि सेठी, तहसील बेतालघाट बताया गया है। पौधारोपण का खर्च परियोजना एजेंसी वहन करेगी तथा लगाए गए पौधों के रखरखाव की जिम्मेदारी 10 वर्ष तक रहेगी।

अभी अंतिम वन स्वीकृति बाकी

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अंतिम वन स्वीकृति नहीं, बल्कि Stage-I/In-Principle मंजूरी है। राज्य सरकार को सभी शर्तों का अनुपालन कर Compliance Report केंद्र सरकार को प्रस्तुत करनी होगी, जिसके बाद अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अंतिम स्वीकृति मिलने तक संबंधित वन भूमि का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता।

“संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं” – हेमंत गोनिया

हेमंत गोनिया का कहना है कि Stage-I मंजूरी संघर्ष की महत्वपूर्ण सफलता है, लेकिन अंतिम वन स्वीकृति बाकी है। जब तक सभी औपचारिकताएं पूरी होकर अंतिम स्वीकृति नहीं मिल जाती, प्रयास जारी रहेंगे।

चार वर्षों की लंबी प्रक्रिया — शिकायत, कार्रवाई, कोविड-19 से बाधा, दोबारा पत्राचार, आरटीआई, प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री तक शिकायतें, पर्यावरण मंत्रालय में शिकायत, हाईकोर्ट कार्यालय से डीएम को पत्र — के बाद अब भुजियाघाट–टोक मोरा सड़क निर्माण एक निर्णायक चरण में पहुंच गया है। ग्रामीणों को अब अंतिम वन स्वीकृति और सड़क निर्माण की वास्तविक शुरुआत का इंतजार है।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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