विश्व शांति की अपील के साथ अधिवक्ता ललित मोहन सिंह जीना ने लिखी कविता

हल्द्वानी (नैनीताल)। अधिवक्ता और साहित्यकार ललित मोहन सिंह जीना (ललितदीप) ने विश्व में बढ़ते युद्ध और अशांति पर चिंता व्यक्त करते हुए शांति का संदेश देने वाली एक कविता की रचना की है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र का चार्टर 24 अक्टूबर 1945 को लागू हुआ था। इस चार्टर का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच शांति, सुरक्षा और सहयोग को मजबूत करना था।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी के बावजूद आज दुनिया में कई स्थानों पर युद्ध और गृहयुद्ध जारी हैं, यहां तक कि कुछ मामलों में सदस्य देशों के बीच भी टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में मानवता और विश्व बंधुत्व को मजबूत करने के लिए युद्धविराम और शांति की प्रार्थना ही एकमात्र रास्ता प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता का सम्मान करना भी संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख उद्देश्य है, ताकि पूरे विश्व में शांति और स्थिरता बनी रहे। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए और विश्व शांति की कामना करते हुए उन्होंने “Oh Lord! May Peace Prevail” (हे प्रभु! शांति बनी रहे) शीर्षक से एक कविता लिखी है।
कविता में शांति का संदेश
अपनी कविता में उन्होंने कहा है कि युद्धों के कारण मानव सभ्यता को भारी और अपूरणीय क्षति हुई है। अब समय आ गया है कि बुद्धिमत्ता, संवाद और युद्धविराम के माध्यम से शांति को स्थापित किया जाए। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की है कि पूरा विश्व बिना किसी बाधा के अपने सामान्य जीवन और कार्यों को शांति से कर सके।
कविता में हथियारों की दौड़, युद्धों की प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रों की संप्रभुता पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने की आवश्यकता बताई गई है। उन्होंने कहा कि दुनिया में भाईचारे, शांति और सौहार्द का वातावरण मजबूत होना चाहिए।
कविता में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान समय में दुनिया में कई युद्ध और गृहयुद्ध चल रहे हैं तथा हजारों परमाणु बम विनाश के लिए तैयार रखे गए हैं। इसके बावजूद विश्व स्तर पर निःशस्त्रीकरण, शांति और भाईचारे के आंदोलनों की आवाज कमजोर पड़ती जा रही है, जो चिंता का विषय है।
उन्होंने मानवता से अपील करते हुए कहा कि ईर्ष्या, आतंक और घृणा जैसे विभाजनकारी विचारों को त्यागकर प्रेम, स्थिरता और शांति की दिशा में आगे बढ़ना होगा। “भूलो और क्षमा करो” की भावना ही स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
वैश्विक समस्याओं पर भी चिंता
कविता में उन्होंने यह भी कहा है कि जब दुनिया को महंगाई, बेरोजगारी, कुपोषण और भूख जैसी समस्याओं से निपटने के लिए प्रयास करने चाहिए, तब युद्धों का माहौल और तनाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में विश्व समुदाय को मिलकर शांति, सहयोग और मानवता की रक्षा के लिए कदम उठाने होंगे।
रचनाकार:
अधिवक्ता ललित मोहन सिंह जीना (ललितदीप)
हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखंड


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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