राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का पूर्व सैनिकों से संवाद “समाज सशक्त होगा तो राष्ट्र सुरक्षित रहेगा”

हरिशंकर सैनी
देहरादून। उत्तराखंड प्रवास के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देहरादून के निम्बूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, गढ़ी कैंट में पूर्व सैनिकों एवं पूर्व सेना अधिकारियों के साथ प्रमुख जन गोष्ठी एवं समन्वित संवाद कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम में सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े सैकड़ों गणमान्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में पूर्व मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत, कर्नल अजय कोठियाल और कर्नल मयंक चौबे ने सरसंघचालक का पारंपरिक सम्मान किया। इस अवसर पर सेना का नेतृत्व कर चुके छह सेवानिवृत्त जनरल, एक वाइस एडमिरल, डीजी कोस्ट गार्ड, कई ब्रिगेडियर तथा 50 से अधिक कर्नल रैंक के अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक सैन्य परिधानों में राष्ट्रभाव से ओतप्रोत होकर शामिल हुए। मंच संचालन राजेश सेठी ने किया।
“राष्ट्र निर्माण का केंद्र समाज”
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति समाज से आती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यदि समाज संगठित, संस्कारित और चरित्रवान होगा तो राष्ट्रीय सुरक्षा स्वतः सुदृढ़ होगी।”
1857 के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर क्रांतिकारी आंदोलनों की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता चेतना कभी समाप्त नहीं हुई।


संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनका मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण था, न कि चुनावी राजनीति। “संघ बिना बाहरी साधनों के खड़ा हुआ और प्रतिबंधों के बावजूद समाज की शक्ति से आगे बढ़ता रहा,” उन्होंने कहा।
जिज्ञासा सत्र में उठे सुरक्षा और नीति के प्रश्न
दूसरे सत्र में पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता, युवा पीढ़ी और नीतिगत विषयों पर प्रश्न रखे।
अग्निवीर योजना पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में भागवत ने कहा कि किसी भी नई व्यवस्था को अनुभव के आधार पर परिमार्जित किया जाना चाहिए। “व्यवस्था समाज और राष्ट्रहित में हो, इसके लिए निरंतर समीक्षा आवश्यक है,” उन्होंने जोड़ा।
नेपाल, बांग्लादेश और कश्मीर से जुड़े प्रश्नों पर उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा और सांस्कृतिक दृष्टि दोनों के प्रति सजग रहना होगा। कश्मीर को उन्होंने भारत का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकात्मता सर्वोपरि है।
सामाजिक समरसता और संवाद पर जोर
हिंदू पहचान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारतीय दृष्टि समावेशी है और समाज में समरसता अनिवार्य है। मंदिर, जलस्रोत और श्मशान जैसे सार्वजनिक स्थल सभी के लिए समान रूप से खुले होने चाहिए।
सोशल मीडिया पर बढ़ती कटुता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि संवाद और शास्त्रार्थ की परंपरा को पुनर्जीवित करना होगा। “जमीनी संवाद से ही नीति प्रभावी बनती है। कटुता का समाधान संवाद से ही संभव है,” उन्होंने कहा।
भ्रष्टाचार ‘नियत’ की समस्या
भ्रष्टाचार के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह केवल व्यवस्था की नहीं, बल्कि नियत की समस्या है। बच्चों में संस्कार, आय में संयम और समाज के प्रति दायित्वबोध को उन्होंने राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।
“स्वार्थ से ऊपर उठकर परोपकार में आनंद खोजिए। व्यक्ति निर्माण ही राष्ट्र निर्माण का आधार है,” उन्होंने कहा।
पलायन और स्थानीय विकास पर चिंता
गढ़वाल और पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए भागवत ने शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय उद्यमिता को समाधान का आधार बताया। उन्होंने कहा कि सुनियोजित प्रयासों से ही पहाड़ों की संभावनाएं साकार हो सकती हैं।
समान नागरिक संहिता (UCC) को उन्होंने राष्ट्रीय एकात्मता का साधन बताया और कहा कि व्यापक सामाजिक सहमति से ही स्थायी समाधान संभव है। जनसंख्या असंतुलन पर भी दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता जताई।
सेवा प्रकल्पों से जुड़ने का आह्वान
भागवत ने पूर्व सैनिकों से आग्रह किया कि वे समाज के भीतर भी सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने बताया कि संघ देशभर में 1 लाख 30 हजार से अधिक सेवा प्रकल्प चला रहा है और शताब्दी वर्ष में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी महत्त्वपूर्ण है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
🔷 हाइलाइटर
प्रमुख बातें
“समाज मजबूत तो राष्ट्र सुरक्षित”
अग्निवीर योजना में सुधार की गुंजाइश
कश्मीर भारत का अभिन्न अंग
संवाद से ही कटुता का समाधान
भ्रष्टाचार नियत की समस्या
कार्यक्रम में कौन-कौन रहे मौजूद
6 सेवानिवृत्त जनरल
वाइस एडमिरल
डीजी कोस्ट गार्ड
50+ कर्नल रैंक अधिकारी
सैकड़ों पूर्व सैनिक
भागवत के प्रमुख उद्धरण
“व्यक्ति निर्माण ही राष्ट्र निर्माण का आधार है।”
“संघ का उद्देश्य प्रचार नहीं, समाज संगठन है।”
“स्वार्थ त्याग कर परोपकार में आनंद की साधना कीजिए।”
(रिपोर्ट: हरिशंकर सैनी, देहरादून)







