सदन में सवाल उठाना ‘हंगामा’ नहीं, लोकतांत्रिक दायित्व: यशपाल आर्य

देहरादून-वाराणसी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें कांग्रेस पर सत्र के दौरान हंगामा करने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष पर आरोप लगाना आसान है, लेकिन जनता के सवालों का जवाब देना कठिन।
उन्होंने कहा कि जब सरकार प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने से बचती है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जुड़े लगभग 40 महत्वपूर्ण विभागों के प्रश्नों के लिए सोमवार नियत नहीं होता, तो विपक्ष का आवाज उठाना स्वाभाविक है। इसे ‘हंगामा’ कहना लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है।
श्री आर्य ने सवाल किया कि क्या विधानसभा सत्र केवल सरकारी उपलब्धियों के बखान और पूर्व-लिखित भाषणों के पाठ के लिए बुलाया जाता है? उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियाँ, बढ़ता भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे सदन में उठाए जाना जरूरी है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष का दायित्व है कि वह सरकार से सवाल पूछे और जनभावनाओं को सदन तक पहुंचाए। कांग्रेस विधायकों ने नियमों के तहत चर्चा की मांग की है और आगे भी करते रहेंगे। नियम 310 सहित सभी संसदीय प्रावधानों का उपयोग किया जाएगा।
उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि सब कुछ ठीक है तो प्रश्नकाल से परहेज क्यों? यदि विकास जमीन पर दिख रहा है तो तथ्यों से परहेज क्यों?
श्री आर्य ने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है, एकतरफा घोषणाओं से नहीं। सदन सरकार का नहीं, जनता की आवाज का मंच है। विपक्ष की आवाज को ‘हंगामा’ कहकर दबाने का प्रयास जनता की आवाज को दबाने जैसा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस न तो डरने वाली है और न ही झुकने वाली। जनता के अधिकारों, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए संघर्ष सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह जारी


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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