बजट 2026 में न नीति का विजन, न राजनीतिक इच्छाशक्ति: यशपाल आर्य

मिशन मोड बना चैलेंज रूट, रिफॉर्म एक्सप्रेस किसी जंक्शन पर नहीं रुकती
हल्द्वानी, 1 फरवरी।
नेता प्रतिपक्ष श्री यशपाल आर्य ने बजट 2026 को देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह विफल बताते हुए कहा कि यह बजट किसी भी समस्या का ठोस समाधान नहीं देता। उन्होंने कहा कि सरकार का “मिशन मोड” अब “चैलेंज रूट” बन गया है और “रिफॉर्म एक्सप्रेस” शायद ही किसी “रिफॉर्म” जंक्शन पर रुकती नजर आती है।
श्री आर्य ने कहा कि बजट में न तो कोई स्पष्ट पॉलिसी विजन दिखाई देता है और न ही राजनीतिक इच्छाशक्ति। अन्नदाता किसान आज भी सार्थक कल्याणकारी सहायता या इनकम सिक्योरिटी प्लान का इंतजार कर रहे हैं। देश में असमानता ब्रिटिश राज के समय से भी आगे निकल चुकी है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं किया गया। SC, ST, OBC, EWS और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भी किसी विशेष सहायता की घोषणा नहीं हुई।
नेता प्रतिपक्ष ने वित्त आयोग की सिफारिशों पर चिंता जताते हुए कहा कि इनके और अध्ययन की जरूरत है, लेकिन ऐसा प्रतीत नहीं होता कि गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही राज्य सरकारों को इससे कोई राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि संघीय ढांचा लगातार कमजोर किया जा रहा है और संघवाद इसका शिकार बन गया है।
श्री आर्य ने बजट की प्रमुख कमियों को रेखांकित करते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र 13 प्रतिशत पर अटका हुआ है, लेकिन इसके पुनरुद्धार की कोई रणनीति नहीं है। “मेक इन इंडिया” केवल नारा बनकर रह गया है। रोजगार के मोर्चे पर युवाओं के लिए नई नौकरियों या महिलाओं की वर्कफोर्स भागीदारी बढ़ाने की कोई गंभीर योजना नहीं दिखाई देती। पिछली इंटर्नशिप और स्किल डेवलपमेंट योजनाओं के परिणामों पर भी चुप्पी साध ली गई है।
उन्होंने कहा कि एक्सपोर्ट और ट्रेड के क्षेत्र में गिरावट, टैरिफ जोखिम, बढ़ते व्यापार घाटे और वैश्विक हिस्सेदारी में कमी पर बजट पूरी तरह मौन है। गिरते रुपये से निपटने के लिए भी कोई ठोस योजना सामने नहीं आई।
गरीब और मध्यम वर्ग को लेकर उन्होंने कहा कि महंगाई से कोई राहत नहीं दी गई है। बचत घट रही है, कर्ज बढ़ रहा है और वेतन स्थिर है, फिर भी कंज्यूमर डिमांड को पुनर्जीवित करने का कोई रोडमैप बजट में नहीं है।
प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पर सवाल उठाते हुए श्री आर्य ने कहा कि भरोसे का कोई संकेत नहीं दिया गया है। FDI और वेतन में ठहराव को नजरअंदाज कर दिया गया और सिर्फ छोटे-मोटे बदलावों से काम चलाने की कोशिश की गई, जबकि जरूरत स्ट्रक्चरल रिफॉर्म की थी।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर उन्होंने कहा कि पुराने वादे दोहराए गए हैं, लेकिन जमीनी डिलीवरी नदारद है। शहर आज भी रहने लायक नहीं बन पाए हैं और “स्मार्ट सिटी” का सपना अधूरा है।
सोशल सिक्योरिटी को लेकर उन्होंने कहा कि कल्याण और सामाजिक सुरक्षा पर एक भी महत्वपूर्ण घोषणा नहीं हुई। MGNREGA की जगह लाने वाले नए कानून के लिए बजट आवंटन पर भी एक शब्द नहीं कहा गया।
अंत में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह बजट न तो समाधान देता है और न ही नीतिगत विफलताओं को छिपाने के लिए कोई ठोस नारा ही पेश कर पाता है।


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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