ड्रोन तकनीक में निपुण बने एनसीसी कैडेट्स, 10 दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का भव्य समापन

हल्द्वानी,। ग्राफ़िक एरा हिल यूनिवर्सिटी, हल्द्वानी में एनसीसी कैडेट्स के लिए आयोजित 10 दिवसीय ‘ड्रोन कैप्सूल प्रशिक्षण सत्र’ का बुधवार को भव्य समापन हो गया। समापन समारोह में कैडेट्स ने प्रशिक्षण के दौरान अर्जित कौशल का शानदार प्रदर्शन किया, जिसने उपस्थित अतिथियों को प्रभावित किया।
इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में विश्वविद्यालय के कैडेट्स के साथ ही जीआईसी मोतीनगर और एमबीजीपीजी कॉलेज के एयर विंग कैडेट्स तथा 78 यूके बटालियन एनसीसी के आर्मी विंग कैडेट्स ने सक्रिय भागीदारी निभाई। 10 दिनों तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में कैडेट्स को ड्रोन तकनीक के आधुनिक पहलुओं की गहन जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने ड्रोन सिमुलेशन के माध्यम से उड़ान संचालन की बारीकियां सीखीं। वहीं, प्रायोगिक सत्रों में उन्होंने ड्रोन के विभिन्न उपकरणों को स्वयं असेंबल कर उसकी कार्यप्रणाली को समझा। कैडेट्स ने ड्रोन के भविष्य में उपयोग और नवाचार विषय पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां भी दीं। उनके द्वारा तैयार किए गए स्टैटिक मॉडल्स आकर्षण का केंद्र रहे।
पूरे प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स का तकनीकी और व्यावहारिक आधार पर लगातार मूल्यांकन किया गया, जिससे उनकी दक्षता को परखा जा सका।
समापन समारोह में कैंपस निदेशक डॉ. एम.सी. लोहानी ने कैडेट्स के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों को भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों के लिए तैयार करते हैं और उनके करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्रुप कैप्टन विवेक रावत (कमांडिंग ऑफिसर, 1 यूके एयर स्क्वाड्रन एनसीसी) ने कहा कि वर्तमान समय में ड्रोन तकनीक की मांग तेजी से बढ़ रही है और कैडेट्स ने जिस उत्साह और लगन से इसे सीखा है, वह सराहनीय है।
कर्नल पुनीत लेहल (कमांडिंग ऑफिसर, 78 यूके बटालियन एनसीसी) ने कहा कि आर्मी और एयर विंग का यह संयुक्त प्रशिक्षण कैडेट्स में टीम वर्क और तकनीकी समझ विकसित करने का उत्कृष्ट माध्यम बना है।
कार्यक्रम में डॉ. कामिका चौधरी ने भी कैडेट्स के नवाचार की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह में एनसीसी के प्रशिक्षकों और विभिन्न इकाइयों के कैडेट्स की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह प्रशिक्षण सत्र कैडेट्स को ड्रोन तकनीक और उसके भविष्य के अनुप्रयोगों की व्यापक समझ देने में सफल रहा।







