हल्द्वानी रिंग रोड परियोजना को मिली रफ्तार, सर्वे के लिए दिल्ली की कंपनी चयनित

हल्द्वानी। शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना एक बार फिर पटरी पर लौटती नजर आ रही है। लंबे समय से लंबित इस महत्वाकांक्षी योजना को अब नई गति मिल गई है। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने सर्वे कार्य के लिए दिल्ली की निजी कंपनी एमएस सक्षम सर्वे सॉल्यूशन का चयन कर उसे कार्यादेश जारी कर दिया है।
निर्धारित शर्तों के अनुसार कंपनी को नौ माह के भीतर विस्तृत सर्वे रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस रिपोर्ट में वनभूमि का आकलन, सड़क की जद में आने वाले पेड़ों की गणना, संभावित लागत और अन्य तकनीकी पहलुओं का पूरा ब्यौरा शामिल रहेगा। रिपोर्ट तैयार होते ही वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी।
वन मंत्रालय को भेजा जाएगा प्रस्ताव
परियोजना के तहत वन भूमि के उपयोग के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह प्रस्ताव डीएफओ, वन संरक्षक और राज्य नोडल अधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार के वन मंत्रालय को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे निर्माण कार्य का रास्ता साफ होगा।
2017 में हुई थी परियोजना की शुरुआत
रिंग रोड परियोजना की शुरुआत अप्रैल 2017 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य शहर में लगातार बढ़ रहे जाम से निजात दिलाना है। करीब 51 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को चार भागों में विभाजित किया गया था।
तीनपानी से काठगोदाम तक का हिस्सा पहले ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा चौड़ा किया जा चुका है, जबकि नरीमन से गुलाबघाटी होते हुए फतेहपुर तक का हिस्सा योजना से हटा दिया गया।
बदला गया रूट, अब जंगल क्षेत्र से गुजरेगी सड़क
अगस्त 2024 में शासन स्तर पर लिए गए फैसले के बाद रिंग रोड के रूट में बदलाव किया गया। अब इसे लामाचौड़ से रामपुर रोड तक ले जाने की योजना है, जिससे रामपुर रोड और कालाढूंगी मार्ग पर आने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्ता मिल सके।
पहले यह सड़क ग्रामीण क्षेत्रों से प्रस्तावित थी, लेकिन स्थानीय विरोध के चलते अब इसे आबादी से सटे जंगल क्षेत्र से निकालने का निर्णय लिया गया है।
26.35 लाख का बजट स्वीकृत
परियोजना के सर्वे कार्य के लिए शासन ने 26.35 लाख रुपये का बजट मंजूर किया है। टेंडर प्रक्रिया में हरियाणा, दिल्ली और पंजाब की तीन कंपनियों ने भाग लिया था, जिनमें तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद दिल्ली की कंपनी को चयनित किया गया।
56 हेक्टेयर वनभूमि और 4280 पेड़ों पर असर संभव
प्रस्तावित रिंग रोड भाखड़ा पुल से फायर लाइन होते हुए रामपुर रोड पर बेलबाबा के पास जाकर जुड़ेगी। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस परियोजना के लिए करीब 56 हेक्टेयर वनभूमि का उपयोग करना पड़ सकता है, जबकि लगभग 4280 पेड़ों के कटान की संभावना जताई गई है।
निर्माण लागत का प्रारंभिक अनुमान करीब 172 करोड़ रुपये है, हालांकि अंतिम आंकड़े विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे।
पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी होगी अनिवार्य
वनभूमि के उपयोग के बदले राज्य सरकार को दोगुनी भूमि पर पौधरोपण करना होगा। यह पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तहत अनिवार्य प्रावधान है, जिससे परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को संतुलित किया जा सके।
शहरवासियों को उम्मीद है कि रिंग रोड के निर्माण से हल्द्वानी में ट्रैफिक जाम की समस्या में काफी हद तक राहत मिलेगी और यातायात व्यवस्था सुगम हो सकेगी।


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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