ऊर्जा विभाग में सुनियोजित भ्रष्टाचार का आरोप, जवाबदेही से नहीं बच सकती सरकार: यशपाल आर्य

देहरादून, 24 फरवरी 2026। प्रदेश के ऊर्जा विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग में जुगाड़, हेराफेरी और सुनियोजित षड्यंत्र के माध्यम से एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी को प्रबंध निदेशक (एमडी) के पद तक पहुंचाया गया। उन्होंने इसे केवल एक अनियमित पदोन्नति नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की साख पर करारा तमाचा बताया।
उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश को “ऊर्जा प्रदेश” बनाने के दावे किए गए, वहीं ऊर्जा विभाग को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है। नियमों को दरकिनार कर शीर्ष पदों पर नियुक्तियां होने से परियोजनाएं लटकेंगी, लागत बढ़ेगी और वित्तीय अनुशासन ध्वस्त होगा, जिसका सीधा नुकसान जनता को उठाना पड़ेगा।
‘बिना संरक्षण संभव नहीं ऐसी पदोन्नति’
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या बिना उच्च अधिकारियों, प्रभावशाली नौकरशाहों और राजनीतिक संरक्षण के कोई तृतीय श्रेणी कर्मचारी सीधे एमडी की कुर्सी तक पहुंच सकता है? यदि नहीं, तो फिर जिम्मेदारी किसकी है? उन्होंने कहा कि केवल एक व्यक्ति को बलि का बकरा बनाकर सरकार अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं में निविदा प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। लागत में असामान्य वृद्धि, मनमाने वित्तीय निर्णय और संदिग्ध ठेकों के आवंटन जैसे गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। ऐसे में यह जांच का विषय है कि क्या इन सबकी डोर किसी संरक्षित तंत्र से जुड़ी है।
न्यायालय के हस्तक्षेप पर सरकार से जवाब की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा सत्र के दौरान Power Transmission Corporation of Uttarakhand Limited (पिटकुल) के एमडी पद पर की गई नियुक्ति पर प्रश्न उठाने की याद दिलाई। उस समय सरकार ने नियुक्ति को “नियमसम्मत” बताया था।
उन्होंने कहा कि अब न्यायालय के निर्णय के बाद सरकार का मौन रहना कई शंकाओं को जन्म देता है। यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप था तो न्यायालय को हस्तक्षेप क्यों करना पड़ा? और यदि न्यायालय ने नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं तो सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
चार प्रमुख मांगें रखीं
नेता प्रतिपक्ष ने मामले में निम्न मांगें रखीं—
संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति से लेकर एमडी पद तक की पूरी सेवा यात्रा की न्यायिक या उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच।
पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कार्मिक विभाग की भूमिका की विस्तृत पड़ताल।
संबंधित अवधि में लिए गए सभी बड़े वित्तीय और नीतिगत निर्णयों का विशेष ऑडिट।
दोषी अधिकारियों और संरक्षण देने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता और सुशासन में विश्वास रखती है तो उसे समयबद्ध जांच की घोषणा कर दोषियों को बेनकाब करना चाहिए। अन्यथा यह माना जाएगा कि पूरा तंत्र भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहा है।
‘ऊर्जा विभाग प्रदेश की आर्थिक रीढ़’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ऊर्जा विभाग प्रदेश की आर्थिक रीढ़ है। यहां का भ्रष्टाचार केवल सरकारी खजाने को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि निवेशकों का विश्वास तोड़ता है और विकास की गति को भी बाधित करता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि क्या चयन प्रक्रिया पारदर्शी थी, क्या पात्रता और वरिष्ठता के मानकों का पालन हुआ और यदि त्रुटि हुई है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी। लोकतंत्र में जवाबदेही सर्वोपरि है। सरकार को प्रदेशहित में सामने आकर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि अनियमितता हुई है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।







