सड़कों से आश्रम तक : संतोषी माता गौशाला में गोमाता की सेवा को समर्पित बाबा भवानी गिरी जी महाराज

हरिशंकर सिंह सैनी
देहरादून, उत्तराखंड
देहरादून (गढ़ी कैंट)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के टपकेश्वर क्षेत्र स्थित संतोषी माता गौशाला आज केवल एक गौशाला नहीं, बल्कि बेसहारा, बीमार और दुर्घटनाग्रस्त गोवंश के लिए जीवन का सहारा बन चुकी है। यह वही स्थान है, जहां सड़कों पर तड़पती गोमाता को नया जीवन मिलता है। इस सेवा कार्य की धुरी हैं बाबा भवानी गिरी जी महाराज, जो पिछले कई दशकों से बिना किसी सरकारी सहायता के गोसेवा में निरंतर जुटे हैं।
1998 से गोसेवा की शुरुआत
टपकेश्वर क्षेत्र में मां संतोषी माता मंदिर की स्थापना के बाद बाबा भवानी गिरी जी महाराज का ध्यान सड़कों पर भटकते गोवंश की पीड़ा की ओर गया। उस समय भी देहरादून की सड़कों पर आवारा गायों की संख्या कम नहीं थी। तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर कई गोवंश घायल हो जाते थे, तो कुछ गंभीर बीमारी से जूझते रहते थे।
बाबा बताते हैं कि शुरुआती दौर में कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। वे सड़कों पर ही घायल गायों का इलाज कराते, दवाइयों की व्यवस्था स्वयं करते और कई बार रातभर उनके पास बैठकर देखभाल करते। यही सेवा धीरे-धीरे उनके जीवन का उद्देश्य बन गई।
सड़कों से आश्रम तक का सफर
समय के साथ घायल और बेसहारा गोवंश की संख्या बढ़ने लगी। तब बाबा ने महसूस किया कि सड़कों पर इलाज कराना पर्याप्त नहीं है। इसी सोच ने संतोषी माता गौशाला की नींव रखी। छोटे से प्रयास के साथ शुरू हुई यह गौशाला आज एक आश्रम का रूप ले चुकी है, जहां निराश्रित गोवंश को सुरक्षित वातावरण, चारा, पानी और उपचार मिलता है।
इलाज और सेवा बनी पहचान
संतोषी माता गौशाला की सबसे बड़ी पहचान यहां मिलने वाला उपचार है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल, टूटे पैरों या गंभीर जख्मों से पीड़ित गायों को यहां प्राथमिक उपचार दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सकों की सहायता ली जाती है।
गौशाला में कई ऐसी गायें हैं, जो महीनों के इलाज के बाद फिर से खड़ी हो सकीं। वहीं, जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं, उन्हें यहां जीवनभर का सहारा मिलता है। बाबा भवानी गिरी जी महाराज कहते हैं,
“गाय बोल नहीं सकती, लेकिन उसकी आंखें बहुत कुछ कह जाती हैं। समय पर इलाज और प्रेम मिल जाए, तो वह भी जीने की इच्छा दिखाती है।”
बिना सरकारी मदद, अपने संसाधनों से सेवा
गौशाला पूरी तरह निजी संसाधनों और श्रद्धालुओं के सहयोग से संचालित होती है। न कोई नियमित सरकारी अनुदान, न स्थायी सहायता। चारा, दवाइयों और देखभाल का पूरा खर्च बाबा स्वयं वहन करते हैं।
आर्थिक संकट भी आते हैं, लेकिन सेवा कार्य कभी नहीं रुकता। बाबा कहते हैं,
“समस्याएं आती हैं, लेकिन गोमाता सामने हो, तो हर परेशानी छोटी लगती है।”
चुनौतियों के बीच अटूट संकल्प
गौशाला चलाना आसान नहीं है। रोजाना चारे की व्यवस्था, साफ-सफाई, बीमार पशुओं की देखभाल और मौसम की मार—हर दिन नई चुनौती लेकर आता है। इसके बावजूद बाबा भवानी गिरी जी महाराज पूरी निष्ठा से सेवा में जुटे हुए हैं।
मानवता और करुणा की मिसाल
आज संतोषी माता गौशाला क्षेत्र में मानवता और करुणा की मिसाल बन चुकी है। आसपास के लोग किसी भी घायल या बीमार गाय की सूचना सबसे पहले बाबा को देते हैं। यह विश्वास उनकी सेवा भावना का प्रमाण है। गौशाला समाज को यह संदेश दे रही है कि मौन प्राणियों के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी है।
भविष्य की उम्मीदें
बाबा भवानी गिरी जी महाराज चाहते हैं कि भविष्य में गौशाला को और व्यवस्थित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक गोवंश को आश्रय और उपचार मिल सके। बेहतर शेड, स्थायी इलाज सुविधा और पर्याप्त चारे की व्यवस्था उनका सपना है।
वे कहते हैं,
“अगर समाज और शासन का सहयोग मिल जाए, तो हम और ज्यादा गायों को नया जीवन दे सकते हैं।”
टपकेश्वर गढ़ी कैंट की संतोषी माता गौशाला सेवा, त्याग और करुणा की जीवंत मिसाल है। बाबा भवानी गिरी जी महाराज का यह प्रयास हमें सोचने पर मजबूर करता है कि यदि एक व्यक्ति ठान ले, तो वह कितने जीवन बचा सकता है।
यदि आप गौशाला में दान या सेवा सहयोग करना चाहते हैं, तो संपर्क करें—
बाबा भवानी गिरी जी महाराज
अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष
मां संतोषी माता सेवा संघ ट्रस्ट
मोबाइल : +91 96270 79924








