मुख्यमंत्री से रू-ब-रू हुए उत्तराखण्ड के नामी शेफ, पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने पर हुआ मंथन

हल्द्वानी (लामाचौड़)। उत्तराखण्ड के विख्यात आम्रपाली विश्वविद्यालय में शनिवार को होटल प्रबंधन विभाग की ओर से आयोजित ‘शेफ संवाद’ कार्यक्रम में राज्य के पारंपरिक भोजन और श्रीअन्न को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑनलाइन माध्यम से प्रदेश के प्रमुख शेफ और आम्रपाली विश्वविद्यालय में अध्ययनरत प्रशिक्षु शेफ से संवाद किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखण्ड के पारंपरिक व्यंजनों, स्थानीय उत्पादों जैसे मक्का, मडुवा, झंगोरा, भट्ट आदि को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर इनके प्रचार-प्रसार की रणनीति तैयार करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक डॉ. विनोद सिंह नेगी ने बताया कि संवाद में आनन्दा होटल ऋषिकेश के शेफ दिवाकर बलोदी, आईटीसी फॉर्च्यून हल्द्वानी के शेफ कुंदन सिंह, रेडिसन नैनीताल की शेफ शिवांगी पवार, गोल्डन टस्क रामनगर के शेफ शांति प्रसाद, द चेमोलिन भीमताल के शेफ किशोर नेगी, आईएचजी वोको रामनगर के शेफ संदीप जुयाल, सराका रिजॉर्ट रामनगर के शेफ सुबोध उपाध्याय, रेडिसन रुद्रपुर के शेफ अनुराग श्रीवास्तव तथा बेकरी शेफ वर्मित विज सहित कई प्रतिष्ठित शेफ शामिल हुए।
परिचर्चा की शुरुआत करते हुए कॉर्डिनेटर डॉ. एस.के. सिंह ने उत्तराखण्ड की संस्कृति और पारंपरिक कुजीन की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। संवाद के दौरान शेफों ने पारंपरिक भोजन को होटल मेन्यू में शामिल करने, स्थानीय उत्पादों की उपलब्धता, जी-20 जैसे बड़े आयोजनों में उत्तराखण्डी व्यंजनों की प्रस्तुति, स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग व निर्यात, फूड ट्रेल्स व बाजार विकसित करने तथा आतिथ्य उद्योग से जुड़े स्टार्टअप को प्रोत्साहन जैसे विषयों पर सवाल रखे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के शेफों को अपने मेन्यू में उत्तराखण्डी भोजन को प्रमुखता देनी चाहिए और स्थानीय मसालों व उत्पादों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि बड़े शहरों में स्थित उत्तराखण्ड भवनों में स्थानीय उत्पादों के काउंटरों से बिक्री हो रही है और कई युवा उद्यमी ऑनलाइन माध्यम से भी इन्हें उपलब्ध करा रहे हैं। जी-20 सम्मेलन और राष्ट्रीय खेलों जैसे आयोजनों में उत्तराखण्डी व्यंजनों की सराहना इसका उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग और निर्यात सबका साथ, सबका विकास की भावना से ही संभव है। सरकार किसानों और स्थानीय कारोबारियों के साथ मिलकर निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल वातावरण बना रही है। उन्होंने बताया कि आतिथ्य उद्योग और स्टार्टअप के लिए आसान ऋण, सब्सिडी, सिंगल विंडो क्लियरेंस और स्किल ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
महिला शेफों द्वारा छात्रवृत्ति और फेलोशिप को लेकर पूछे गए सवालों पर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि पर्यटन विभाग के माध्यम से इस दिशा में कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि पारंपरिक उत्तराखण्डी भोजन में करियर बनाने वाले युवाओं को घर जैसा स्वाद बनाए रखने और रेसिपी को संरक्षित करने पर ध्यान देना चाहिए।

प्रशिक्षु शेफों से संवाद में मुख्यमंत्री ने अपने पसंदीदा उत्तराखण्डी भोजन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें मां के हाथ का बना पारंपरिक भोजन बेहद प्रिय है और मेहमानों को भी उत्तराखण्डी थाली ही परोसी जाती है। उन्होंने कहा कि पहाड़ की दालें, सब्जियां और श्रीअन्न स्वास्थ्य और ऊर्जा का भंडार हैं, जिन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
इस अवसर पर होटल प्रबंधन विभाग की कॉफी टेबल बुक ‘रूट्स ऑफ द रिज – ए जर्नी थ्रू कुजीन, कल्चर एंड ट्रेडिशन ऑफ उत्तराखण्ड’ का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम के अंत में आम्रपाली विश्वविद्यालय के सीईओ डॉ. संजय ढींगरा ने मुख्यमंत्री और सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत, हल्द्वानी-काठगोदाम के महापौर गजराज सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल सहित जिला प्रशासन, विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।








