ग्रीन एनर्जी अपनाकर ही बचाया जा सकता है पर्यावरण: डॉ. विष्ट

देहरादून। ओएनजीसी में शुक्रवार से तेल और गैस बचाओ, हरित ऊर्जा अपनाओ नारे के साथ 15 दिवसीय तेल एवं गैस संरक्षण पखवाड़ा (सक्षम) का शुभारंभ किया गया। इस दौरान आमजन को पेट्रोलियम उत्पादों के सीमित और समझदारीपूर्ण उपयोग के लिए जागरूक किया जाएगा। कौलागढ़ स्थित ओएनजीसी ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में अभियान का औपचारिक उद्घाटन किया गया।
मुख्य अतिथि आईआईपी के निदेशक डॉ. हरेंद्र विष्ट ने सक्षम पखवाड़े का उद्घाटन करते हुए कहा कि ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देकर ही पर्यावरण को बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ओएनजीसी द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान जनता और उद्योगों के बीच ईंधन बचत, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
डॉ. विष्ट ने कहा कि तेल और गैस के संरक्षण से न केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा, बल्कि जीवन स्तर भी बेहतर बनेगा। पेट्रोलियम उत्पादों के अत्यधिक उपयोग से निकलने वाली हानिकारक गैसें ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती हैं। उन्होंने लोगों से निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और रेड लाइट पर वाहन बंद करने जैसे छोटे-छोटे कदम अपनाने की अपील की। कहा कि यदि हर व्यक्ति अपना योगदान दे, तो इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा।


इस अवसर पर ओएनजीसी मानव संसाधन सेवा प्रमुख नीरज कुमार शर्मा ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तेल और गैस संरक्षण पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि एक परिवार भी दस यूनिट बिजली बचाता है, तो करोड़ों परिवारों के सहयोग से पर्यावरण पर बड़ा सकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने शेयरधारकों से भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
ओएनजीसी के जनरल मैनेजर (तकनीक) ई. हक ने बताया कि सक्षम अभियान पीसीआरए का प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम है। इसके तहत सभी वर्क सेंटर्स पर साइकिल रैलियां, कार्यशालाएं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं और स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे ईंधन बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी का संदेश दिया जाता है।
समारोह में ओएनजीसी के कार्यकारी निदेशक के. आर. बाबू और आनंद कुमार सिन्हा ने भी तेल एवं गैस संरक्षण पर अपने विचार रखे और लोगों से ग्रीन एनर्जी के अधिकाधिक उपयोग की अपील की।


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गिरीश भट्ट

मुख्य संवाददाता - मानस दर्पण

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