नैनीताल जिले में विकास की असमानता: चाफी और अलचौना के अलावा कोई गांव क्यों नहीं?

उत्तराखंड में जल्द ही 16वें वित्त आयोग की टीम आने वाली है, जो राज्य के विभिन्न पहलुओं का अवलोकन करेगी। इस दौरान नैनीताल जिले में भी टीम का आगमन होगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या जिले के अधिकारी एक ही गांव चाफी और अलचौना को बार-बार दिखाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर पाएंगे?

नैनीताल जिले में 1141 गांव, लेकिन विकास की दृष्टि से केवल दो गांव

नैनीताल जिले में 1141 गांव हैं, लेकिन लगता है कि सरकार और जिला प्रशासन की नजर में केवल चाफी और अलचौना ही विकास के प्रतीक हैं। इन दोनों गांवों में चड्ढा जी के पॉलीहाउस और सब्सिडी वाले प्रोजेक्ट्स को बार-बार दिखाया जाता है, लेकिन क्या इससे पहाड़ की खेती और किसानी का भला हो पाएगा?

सरकार को सोचना चाहिए

सरकार और जिला प्रशासन को सोचना चाहिए कि आखिर क्यों चाफी और अलचौना के अलावा कोई अन्य गांव विकसित नहीं किया जा सका है। क्या जिले के अन्य गांवों में विकास की कोई गुंजाइश नहीं है? क्या सरकार की प्राथमिकता केवल कुछ चुनिंदा गांवों तक ही सीमित है?

विकास की नई दिशा की आवश्यकता

अब समय आ गया है कि सरकार और जिला प्रशासन विकास की नई दिशा में सोचें और जिले के अन्य गांवों को भी विकास की मुख्यधारा में शामिल करें। इससे न केवल जिले का समग्र विकास होगा, बल्कि पहाड़ की खेती और किसानी को भी नई दिशा मिलेगी।


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गणेश मेवाड़ी

संपादक - मानस दर्पण

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