हनुमान चालीसा और भजनों की गूंज के बीच बुजुर्गों संग मनाया नववर्ष, विरासत वृद्ध आश्रम में भावनात्मक आयोजन

हल्द्वानी। नववर्ष 2026 का स्वागत इस बार विरासत वृद्ध आश्रम में कुछ अलग ही अंदाज में किया गया। नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड एंटी करप्शन फोर्स के प्रदेश महासचिव शत्रुघ्न पांडे ‘डिंपल’ के नेतृत्व में समाजसेवा की भावना के साथ आश्रम में निवासरत बुजुर्गों के संग नए साल का स्वागत पूरे श्रद्धा, स्नेह और आत्मीयता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान आश्रम परिसर भक्ति, संवेदना और अपनत्व के भाव से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा के पाठ से की गई। इसके बाद भजनों की मधुर धुनों के साथ बुजुर्गों ने भी पूरे उत्साह और मनोयोग से सहभागिता की। भजन-कीर्तन के दौरान कई बुजुर्ग भावविभोर नजर आए और उनके चेहरों पर संतोष व खुशी की मुस्कान दिखाई दी। नववर्ष का यह स्वागत उनके लिए यादगार बन गया।
इस अवसर पर शत्रुघ्न पांडे ‘डिंपल’ ने बुजुर्गों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका हालचाल जाना और उनके जीवन अनुभवों को सुना। उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठजन हमारी अमूल्य धरोहर हैं। उनका सम्मान करना और उनके साथ समय बिताना हम सभी का नैतिक दायित्व है। ऐसे आयोजन समाज में संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान बुजुर्गों को सम्मानित भी किया गया और उनके साथ नववर्ष की खुशियां साझा की गईं। विरासत वृद्ध आश्रम की संचालक शशि सिंह ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से बुजुर्गों को मानसिक संबल मिलता है और उन्हें यह एहसास होता है कि समाज आज भी उनके साथ खड़ा है। उन्होंने आयोजन के लिए सभी सहयोगियों का आभार जताया।
वहीं कार्यक्रम में उपस्थित दीप्ती चुफ़ाल ने कहा कि बुजुर्गों के साथ नया साल मनाना अत्यंत भावनात्मक अनुभव है। उनके आशीर्वाद और मुस्कान ही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता है। उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों को निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में पुनम आर्या, दीप्ती चुफ़ाल, डिंपल पांडे, प्रशांत श्रोतरिया, प्रसन्न जोशी, लक्ष्मण आर्या, भवानी बिष्ट, नन्दा सेंट एवं पुष्कर सिंह मेहरा सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
नववर्ष 2026 के स्वागत का यह आयोजन नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड एंटी करप्शन फोर्स की सामाजिक प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बना, जहां सेवा, सम्मान और संस्कार का सुंदर संगम देखने को मिला।








